वाक़ये
हो सकता है , हुआ भी हो शायद ,
ज़ेहन में करछाते वाक़ये रहे हों ,
तेज़ क़दम चलने में
ज़मीन की धूल-से उभर आये हों ।
हो सकता है , हुआ भी हो शायद ।
कुछ उनमे से अंधे रहे हों वाक़ये ,
देख ना पाए हों हकीक़त या कि
नज़र पर चश्मा रखना भूल गए हों ।
हो सकता है , हुआ भी हो शायद ।
----- निशांत
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