यहाँ हवा तो नहीं होगी
कोई सरसराहट भी सुनाई देती नहीं यहाँ ,
यकीन है फिर यहाँ हवा तो नहीं होगी ;
सुना है वो मुकाम जिस पर वो आज है
वो हासिल अब तक किसी को नहीं है ,
यकीन है फिर वहाँ 'इंसानियत' नहीं होगी...................
जहाँ पर सिर्फ दौलत हो मुद्दे की बात ,
नसीहतों में भी हो दौलत बढ़ने की बात ,
यकीन है फिर वहाँ 'मासूमियत' नहीं होगी ................
कहते हैं हमसे भी लोग वही सब करने को ,
उन्ही बदरंग शौकों को फर्जी
जरूरतों में बदलने को ,
यकीन हमें है कि उन लोगों में कोई 'शराफत' नहीं होगी............
जो कहते हैं वही कर भी दे तो क्या बात ,
वादे सबसे किये जो-
याद रखे तो क्या बात ,
यकीनन , उन्हें वादा-खिलाफी पर कोई 'शर्म' नहीं होगी ..............
वो रूठ जाते हैं मनाता है उनको हर कोई ,
हर बात पे उखड़ते हैं ,
भला ये क्या बात हुई?
यकीनन , अश्कों के लिए उनके कोई 'हिसाब' नहीं होंगे.................
यहाँ, जहाँ हूँ ,वहाँ हवा तो है नहीं ;
हवा नहीं तो फिर पानी कैसे ?
अब यकीं हो गया , यहाँ ज़िन्दगी नहीं होगी...................
--------------निशांत
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