Thursday, 24 November 2011

यहाँ हवा तो नहीं होगी



                                          यहाँ हवा तो नहीं होगी 

    कोई सरसराहट भी सुनाई देती नहीं यहाँ ,
                   यकीन है फिर यहाँ  हवा तो नहीं  होगी ;

     सुना है वो मुकाम जिस पर  वो आज है
                  वो हासिल अब तक किसी को नहीं है ,
      यकीन है फिर वहाँ 'इंसानियत' नहीं होगी...................


    जहाँ पर सिर्फ दौलत हो मुद्दे की बात ,
                  नसीहतों में भी हो दौलत बढ़ने की बात ,
     यकीन है फिर वहाँ  'मासूमियत' नहीं होगी ................


    कहते हैं हमसे भी लोग वही सब करने को ,
                 उन्ही बदरंग शौकों को फर्जी
           जरूरतों में बदलने को ,
     यकीन हमें है कि उन लोगों में  कोई 'शराफत' नहीं होगी............


   जो कहते हैं वही  कर भी दे तो क्या बात ,
                 वादे सबसे किये जो-
    याद रखे तो क्या बात ,
    यकीनन , उन्हें वादा-खिलाफी पर कोई 'शर्म' नहीं होगी ..............


     वो रूठ जाते हैं मनाता है उनको हर कोई ,
                 हर बात पे उखड़ते हैं ,
           भला ये क्या बात हुई?
  यकीनन , अश्कों के लिए उनके कोई 'हिसाब' नहीं होंगे.................


       यहाँ, जहाँ हूँ ,वहाँ हवा तो है नहीं ;
                 हवा नहीं तो फिर पानी कैसे ?
      अब यकीं हो गया , यहाँ ज़िन्दगी नहीं होगी...................



                                              --------------निशांत



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