मुखौटे
ये जाने से चेहरे हैं या मुखौटे हैं ,
जाने हुए से होके भी अनजाने हैं|
रूप-रँग से मुझे पहचानते यहाँ कई हैं,
कहता नहीं तो चुप्पी समझने वाले कई हैं ,
सूरत पे मेरी कुछ झलकता नहीं ,तो-
'मैं मुस्कुराता हूँ' येमानने वाले कई हैं|
मेरे घर में मुझे चाहता था हर कोई,
कई बार उनकी यादों ने मेरी पलकें भिगोई ,
गर्म खाने से पहले वहाँ बुलाता था हर कोई,
खाना ठण्डा भी खिलाने वाला नहीं यहाँ कोई|
हसरतों के मंज़र में मुझको सुकून था,
हासिल तमाम करने का भी गुरूर था,
सोचा करीब था पाया दूर आ गया ,
"मुखौटों की भीड़ में एक मुखौटा आ गया |"
--- निशांत
i find this as one of the best....
ReplyDeleteawesome yaar... karri feeling hai....
B-)
DHANYAWAAD MAULI...
ReplyDeleteWAISE ITNE INTEZAAR KE BAAD KOI COMMENT MILTE HAIN TO KHUD -B-KHUD ACHHA LAGTA HAI..