ज़िद उठी है..........................
१. तुम्हे तुमसे मांग लेने को
मेरे दिल में ज़िद उठी है ,
तुम्हे अपना बनाने की
मेरे दिल में कसक जगी है..
२. देखकर तुमको कुछ ऐसा लगा ,
जाना पहचाना सा मुखड़ा लगा
करीब से देखकर तेरी तस्वीर सीने में छुपा ली है,
कि, तभी से मेरे सीने में हलचल मची है..
३.
यूँ लगा जैसे कोई आ गया ,
जलजलों से जहाज पार आ गया...
कोई था नहीं , वो तो धड़कने सुन ली थी मैंने ,
यार मेरे, धडकनों में उसकी आहट बसी है ;
४.
अब तो हद भी बेहद हो चुकी है ,
खामोशियों को आवाज़ मिल गयी है..
गीत मेरे कुछ प्यारे बन पड़े हैं
क्यों? क्योंकि इनमे -
उसकी बातो कि मिश्री घुली है...
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(-----निशान्त )
YE RACHNA TAREEKH 24 FEB.2011 KI LIKHI HUI HAI....MERE DWAARA ...
ReplyDeleteYAHI KOI 10 BAJE RAAT KE TIME PAR....
बहुत सुंदर ...अच्छी बन पड़ी हैं पंक्तियाँ
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