मैं एक पाती हूँ
मैं एकांत गगन चिर का पंछी ,
सँझा दीपक की बाती हूँ ,
इच्छा तरु से जो जा टूटा ,
मैं वो धूम धूसरित पाती हूँ..|
इस पाती को मत मृत समझो ,
इस पाती में भी जीवन है,
स्वाहा खुद हो कुछ गर्मी दे,
मैं शांत,स्वतंत्र वो पाती हूँ... |
----------------------- निशांत
Gahan Abhivykti.... Sunder Panktiyan
ReplyDeletedhanyawaad
Delete