तन्हा कोशिश
ज़िन्दगी रही थी बीत जाने किस फ़िराक में
मुद्दतों बाद आशिकी फिर से जवान हैं..|
समाँ है बदल रहा , मौसम भी बदल रहे;
क्या नशा है मौजूद ,क्या साकी के ख्वाब हैं!
मौजों में क्या बाकी नहीं थोड़े भी हसीं सितम
दर्द भरे साहिल को कितना इनका इंतज़ार है...|
फूल खिल जाते हैं सुना अब बंजर ख्यालों से
महफ़िल-ए-ग़ज़ल की कैसी बदनामियाँ ये हैं!
जरूरी है बस मशगूल रहना 'निशांत'
ऊब से बचने की कैसी तन्हा कोशिशें ये हैं....|
ONE OF MY VERY FAVOURITE 4 VERY SPECIAL REASONS..
ReplyDeleteज़िन्दगी रही थी बीत जाने किस फ़िराक में
ReplyDeleteमुद्दतों बाद आशिकी फिर से जवाँ हैं..
Khoob Kaha...Bahut Sunder
dhanyawaad monica ji..
Deleteवाह ! बेहद खूबसूरती से कोमल भावनाओं को संजोया इस प्रस्तुति में आपने ...
ReplyDeletedhanyawaad sanjay ji ...bas aap logo ki beshkeemati taareefo ke liye aur achha likhta rahoonga...
ReplyDelete